स्वामी विवेकानंद
स्वामी विवेकानन्द सर्वश्रेष्ठ विचार- भाग ४ ( Swami Vivekanand Ke Suvichar )
21:39 उपेन्द्र कुमार 'हिन्दू' 0 Comments◙ जब कभी मैं किसी व्यक्ति को उस उपदेशवाणी (श्री रामकृष्ण के वाणी) के बीच पूर्ण रूप से निमग्न पाता हूँ, जो भविष्य में संसार में शान्ति की वर्षा करने वाली है, तो मेरा हृदय आनन्द से उछलने लगता है। ऐसे समय मैं पागल नहीं हो जाता हूँ, यही आश्चर्य की बात है।
~ स्वामी विवेकानन्द
◙ 'बसन्त की तरह लोग का हित करते हुए' - यहि मेरा धर्म है। "मुझे मुक्ति और भक्ति की चाह नहीं। लाखों नरकों में जाना मुझे स्वीकार है, बसन्तवल्लोकहितं चरन्तः- यही मेरा धर्म है।"
~ स्वामी विवेकानन्द







